The Trade Desk पर 19 अक्टूबर को वोट: ज़्यादा-से-ज़्यादा 15.6 मिलियन ऑप्शनों की कीमत रीसेट करने का प्रस्ताव; Jeff Green के पास 50.2% वोटिंग पावर

सोमवार, 19 अक्टूबर को The Trade Desk के शेयरधारक ज़्यादा-से-ज़्यादा 15.6 मिलियन ऑप्शनों का ऑप्शन री-प्राइसिंग (repricing), यानी स्ट्राइक प्राइस (strike price) रीसेट करने, पर मतदान करेंगे। ये ऑप्शन आज के शेयर भाव से कहीं ऊंचे दामों पर जारी हुए हैं। संस्थापक-सीईओ Jeff Green खुद 1.6 मिलियन ऑप्शन पाए हुए हैं और 50.2% वोट उन्हीं के हाथ में हैं, मगर सितंबर में छंटनी हुए कर्मचारी इस सूची में जगह नहीं पाए हैं।

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Richard TangRichard Tang · 3 min read
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The Trade Desk के संस्थापक और सीईओ Jeff Green
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The Trade Desk के संस्थापक और सीईओ Jeff Green। उनके क्लास-बी (Class B) शेयरों पर हर शेयर के 10 वोट मिलते हैं, इसीलिए सोमवार के ऑप्शन री-प्राइसिंग मतदान में उनके पास 50.2% वोटिंग पावर है।

The Trade Desk+0.33% — The Trade Desk, up 0.33 percent today में सोमवार को होने वाले शेयरधारक मतदान का नतीजा किसी शक का विषय नहीं है, और उसकी वजह कंपनी की अपनी प्रॉक्सी स्टेटमेंट (proxy statement) में साफ लिखी है। 19 अक्टूबर को इस विज्ञापन खरीद (ad buying) सॉफ्टवेयर कंपनी के शेयरधारक उन 1,55,82,540 स्टॉक ऑप्शनों का एक्सरसाइज़ प्राइस (exercise price) घटाकर उसी दिन के क्लोजिंग प्राइस पर लाने पर वोट करेंगे। ये ऑप्शन 2017 से अब तक 3.69 डॉलर से लेकर 122.59 डॉलर तक के स्ट्राइक पर जारी किए गए हैं 1।

संस्थापक और सीईओ Jeff Green खुद इनमें से 1.6 मिलियन ऑप्शन रखते हैं, और हर शेयर पर 10 वोट वाले क्लास-बी शेयरों के ज़रिए कुल वोटिंग पावर का 50.2% उनके पास है। यानी जिस प्रस्ताव को सिर्फ डाले गए वोटों का बहुमत चाहिए, वह वे अकेले ही पास कर सकते हैं 1। प्रॉक्सी स्टेटमेंट अपने शब्दों में लिखती है कि मंजूरी "हमारे एग्जीक्यूटिव अधिकारियों को लाभ पहुंचा सकती है" 1।

नतीजे फिसले और एक हफ्ते बाद ही बोर्ड का फैसला

बोर्ड ने री-प्राइसिंग को 13 अगस्त को मंजूरी दी — जून तिमाही के नतीजे आने के एक हफ्ते बाद 1। दूसरी तिमाही की आमदनी 715 मिलियन डॉलर रही, यानी साल पहले के मुकाबले 3% ज़्यादा। मगर सितंबर तिमाही के लिए कंपनी की गाइडेंस कम से कम 650 मिलियन डॉलर है — ऐसा हुआ तो कम से कम तीन साल में पहली बार आमदनी सालाना आधार पर घटेगी 23।

4 सितंबर को कंपनी ने करीब 575 लोगों की छंटनी की 4। यह संख्या 2025 के अंत में कंपनी के बताए 3,843 फुल-टाइम कर्मचारियों का करीब 15% है 5।

सितंबर में निकाले गए लोग इस सूची में नहीं

री-प्राइसिंग में शामिल होने के लिए ज़रूरी है कि ऑप्शन धारक सोमवार तक कंपनी में कार्यरत हो और उसे बर्खास्तगी का कोई नोटिस न मिला हो। बोर्ड छूट दे सकता है, लेकिन प्रॉक्सी स्टेटमेंट ऐसा कोई वादा नहीं करती 1। पात्र ऑप्शन रखने वाले 2,342 गैर-एग्जीक्यूटिव कर्मचारियों को सोमवार का भाव मिलेगा, जबकि सितंबर में निकाले गए लोगों के पास वही स्ट्राइक बचेंगे जिस तक 12.18 डॉलर पर बिकता शेयर शायद कभी न पहुंचे 16।

Green को सितंबर में अलग से जो परफॉर्मेंस ग्रांट मिली — 14.97 डॉलर के स्ट्राइक पर 70 लाख शेयर — वह उसी दिन दी गई, जिस दिन बोर्ड ने रिकॉर्ड डेट (record date), यानी यह तय करने वाली तारीख कि कौन वोट कर सकता है, तय की थी। यह ग्रांट रीसेट के दायरे से बाहर है 41।

दो साल में 27% बढ़त से 12% गिरावट की गाइडेंस तक

  • राजस्व वृद्धि, साल-दर-साल
  • Estimate
-20%-10%0%10%20%30%तीसरी तिमाही '24पहली तिमाही '25तीसरी तिमाही '25पहली तिमाही '26तीसरी तिमाही '26 गाइडेंस-12%3%मतदान इस रिपोर्ट से पहले होगा
Data
राजस्व वृद्धि, साल-दर-साल
तीसरी तिमाही '2427.3%
चौथी तिमाही '2422.3%
पहली तिमाही '2525.4%
दूसरी तिमाही '2518.7%
तीसरी तिमाही '2517.7%
चौथी तिमाही '2514.3%
पहली तिमाही '2611.8%
दूसरी तिमाही '263%
तीसरी तिमाही '26 गाइडेंस (estimate)-12%
कैलेंडर तिमाही के हिसाब से साल-दर-साल राजस्व वृद्धि, The Trade Desk की SEC फाइलिंग से। आखिरी बिंदु कंपनी की गाइडेंस है — पिछले साल के 739 मिलियन डॉलर के मुकाबले कम से कम 650 मिलियन डॉलर — जैसा Trefis ने बताया है।3,8

टैलेंट बनाए रखने की दलील सही है, लेकिन ढांचा ही असल कहानी खोलता है

बोर्ड की चिंता जायज़ है — 12 डॉलर पर बिकते शेयर पर 122.59 डॉलर तक के स्ट्राइक वाले ऑप्शन किसी को बांधे नहीं रखते। बोर्ड के सलाहकारों ने पहले एक्सचेंज ऑफर (exchange offer) पर विचार किया, पर टेंडर-ऑफर के नियमों में वह बहुत धीमा और खर्चीला पड़ता, इसलिए छोड़ दिया गया। नए ग्रांट का विकल्प भी सोचा गया, लेकिन उससे नई डाइल्यूशन (dilution) जुड़ती, इसलिए वह भी रद्द हुआ। आखिरकार री-प्राइसिंग ही चुनी गई 1।

खुद Green ने मार्च में करीब 150 मिलियन डॉलर के शेयर खरीदे थे — यह दांव लगाते हुए कि एक दशक में बनाए गए AI टूल्स ही कंपनी का टर्नअराउंड (turnaround) लाएंगे 5। इन्हीं में से सबसे नए प्रोडक्ट अब तक टॉपलाइन, यानी राजस्व, नहीं हिला पाए हैं 3। और अगर टर्नअराउंड आता है, तो उसे खड़ा करेंगे वही लोग, जिन्हें बनाए रखने के लिए यह री-प्राइसिंग तैयार की गई है।

कुछ होल्डर टर्नअराउंड का इंतज़ार नहीं कर रहे

कुछ होल्डर फैसला कर चुके हैं — इन्वेस्टमेंट फंड Vision Capital ने निवेशकों को बताया कि उसने तीसरी तिमाही में अपनी हिस्सेदारी बेच दी, क्योंकि ग्रोथ अब अमेज़न+5.38% — अमेज़न, up 5.38 percent today, गूगल और मेटा−0.47% — मेटा, down 0.47 percent today से पीछे है 7। 650 मिलियन डॉलर की इस निचली सीमा को परखने वाले सितंबर-तिमाही के नतीजे अभी आने बाकी हैं 3।

री-प्राइसिंग टैलेंट बनाए रखने का सही औज़ार हो सकती है। लेकिन जो संस्थापक अपने ही वोटों से अपना ही स्ट्राइक रीसेट कर लेता है — और जिन लोगों को उसने सितंबर में निकाला, वे हाथ में वही कागज़ थामे बैठे हैं जिन तक शेयर शायद दोबारा कभी न पहुंचे — उसने शेयरधारकों को साफ़ दिखा दिया है कि इस साल की कीमत असल में कौन चुका रहा है।

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AI-generated from this story and its cited sources. Not investment advice.

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